aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "fantasy"
छोड़ जाए जो कोई चाहने वाला 'फ़रताश'ज़िंदगानी रह-ए-सफ़्फ़ाक पे आ जाती है
उम्र भर बात पे क़ाएम रहे 'फ़रताश' कि हमअहल-ए-किरदार हैं और इस से ज़ियादा क्या हों
इश्क़ हूँ जुरअत-ए-इज़हार भी कर सकता हूँख़ुद को रुस्वा सर-ए-बाज़ार भी कर सकता हूँ
सर पे हर्फ़ आता है दस्तार पे हर्फ़ आता हैतंग हों लोग तो सरदार पे हर्फ़ आता है
मुद्दई बारगाह-ए-मोहब्बत में 'फ़रताश' थे और भीमेरा ही नाम लेकिन पुकारा गया मैं तो मारा गया
निभा सका न तअ'ल्लुक़ कोई भी मैं 'फ़रताश'यहाँ है कौन कि जिस को नहीं गिला मिरे साथ
हम हैं बस इज़्न-ए-सफ़र होने तकख़ाक और ख़ाक-ब-सर होने तक
हम समझ पाए न 'फ़रताश' मिज़ाज-ए-ख़ूबाँदिल चुराएँ तो कभी आँखें चुराने लग जाएँ
मूजिब-ए-इश्क़ थी मगर 'फ़रताश'आगही थी न पंद थी ख़ुशबू
कभी था क़ैस कभी 'मीर' और अब 'फ़रताश'सुलूक-ए-इश्क़ का इक सिलसिला बना हुआ हूँ
ज़माना-साज़ है 'फ़रताश' उस के क्या कहनेकि ख़ुद ही क़त्ल करे और ख़ूँ-बहा ले जाए
ये दिल-कथा है अदाकार तेरे बस में नहींमैं ख़ून थूकता किरदार तेरे बस में नहीं
इस बरस भी न आ सका 'फ़रताश'वक़्फ़-ए-तंख़्वाह हो गया होगा
मैं भूल बैठा हूँ हँसना 'फ़रताश' भूल बैठाहुआ है ख़ुशियों का बंद मुझ पर किवाड़ ऐसा
आँख ने देखा सर-ए-शाम वो मंज़र 'फ़रताश'करना चाहूँ भी तो तस्वीर नहीं कर सकता
ग़ज़ब त्रिवेणियाँ 'गुलज़ार' तेरीग़ज़ल फ़रताश 'हाफ़ी' और बारिश
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