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ग़ज़ल
मेरे नालों से लरज़ता था कभी चर्ख़-ए-कुहन
अब तो फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँ करने की ताक़त भी नहीं
नरेश एम. ए
ग़ज़ल
बुलबुल न बाज़ आइयो फ़रियाद-ओ-आह से
कब तक न होगी क़ल्ब-ए-गुल-ए-तर को इत्तिलाअ
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
'रज़ा' कब से यही फ़रियाद है बाग़-ए-तमन्ना की
मुझे लूटे चला जाएगा मेरा बाग़बाँ कब तक
आले रज़ा रज़ा
ग़ज़ल
हर चीज़ की गिरानी ने वीरान कर दिया
सर्फ़-ए-ख़िज़ाँ है हिन्द का गुलज़ार आज-कल
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
वफ़ा-ए-दिलबराँ है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद-ए-दिल-हा-ए-हज़ीं का किस ने देखा है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
त'आवुन भी मिला फ़रियाद-ओ-आह-ओ-अश्क-बारी का
मगर यूँही किया हर मरहला तय बे-क़रारी का
शहराम सर्मदी
ग़ज़ल
वही अरमान जैसे जी जो मुश्किल से निकलते हैं
ब-शक्ल-ए-अश्क-ओ-फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँ दिल से निकलते हैं
तिलोकचंद महरूम
ग़ज़ल
कोई नाला कोई गिर्या कोई आँसू कोई आह
कोई फ़रियाद-ए-अलम-अंगेज़ ला-हासिल नहीं
सय्यद ग़ाफ़िर रिज़वी फ़लक छौलसी
ग़ज़ल
बे-नाला-ओ-फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँ रह नहीं सकते
क़हर इस पे ये है इस का सबब कह नहीं सकते
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल
गिर्या बे-तासीर ओ फ़रियाद-ए-दिल-ए-मुज़्तरिब ख़राब
कार-ए-इश्क़-ओ-आशिक़ी नाक़िस तमाम अक्सर ख़राब