आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "frd"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "frd"
ग़ज़ल
गिर्या-कुनाँ की फ़र्द में अपना नहीं है नाम
हम गिर्या-कुन अज़ल के हैं गिर्या किए बग़ैर
जौन एलिया
ग़ज़ल
मेरा सर हाज़िर है लेकिन मेरा मुंसिफ़ देख ले
कर रहा है मेरी फ़र्द-ए-जुर्म को तहरीर कौन
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
आख़िर हम ही मुजरिम ठहरे जाने किन किन जुर्मों के
फ़र्द-ए-अमल थी जाने किस की नाम हमारा लिक्खा था
अहमद सलमान
ग़ज़ल
ऐसे शख़्स को मीर बनाया जो बस ख़्वाब दिखाता था
बस्ती के लोगों ने अपना-आप मुक़द्दर फोड़ लिया