आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "gard-e-kuu-e-yaar"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "gard-e-kuu-e-yaar"
ग़ज़ल
वो कू-ए-यार को जाते हैं बे-नियाज़ नहीं
हैं संग-ए-दिल ही वहाँ कोई दिल-नवाज़ नहीं
आदित्य पंत नाक़िद
ग़ज़ल
तंग करते हैं हमें क्यूँ पासबान-ए-कू-ए-दोस्त
और हैं दो-चार दिन हम मेहमान-ए-कू-ए-दोस्त
रशीद रामपुरी
ग़ज़ल
हमारी ख़ाक-ए-अफ़्सुर्दा सर-ए-कू-ए-बुताँ रख दी
कहाँ की चीज़ थी तू ने कहाँ ऐ आसमाँ रख दी