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ग़ज़ल
कोई फ़िहरिस्त लफ़्ज़ों की या गूगल को खंगालेगा
वो मेरी चुप से अब कोई नया मतलब निकालेगा
फ़ौज़िया शेख़
ग़ज़ल
दफ़्न जब ख़ाक में हम सोख़्ता-सामाँ होंगे
फ़िल्स माही के गुल-ए-शम-ए-शबिस्ताँ होंगे
मोमिन ख़ाँ मोमिन
ग़ज़ल
ये ख़याल सारे हैं आरज़ी ये गुलाब सारे हैं काग़ज़ी
गुल-ए-आरज़ू की जो बास थे वही लोग मुझ से बिछड़ गए
ऐतबार साजिद
ग़ज़ल
नहीं ये है गुलाल-ए-सुर्ख़ उड़ता हर जगह प्यारे
ये आशिक़ की है उमड़ी आह-ए-आतिश-बार होली में