आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "gul-farosh-e-shoKHi-e-daaG-e-kohan"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "gul-farosh-e-shoKHi-e-daaG-e-kohan"
ग़ज़ल
है नाज़-ए-मुफ़्लिसाँ ज़र-ए-अज़-दस्त-रफ़्ता पर
हूँ गुल-फ़रोश-ए-शोख़ी-ए-दाग़-ए-कोहन हुनूज़
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ईज़ा-कुशी का दौर बहार-ए-हयात है
दिल अपना गुल-फ़रोशी-ए-दाग़-ए-जफ़ा करे
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
जब से उस शोख़-ए-गुल-अंदाम को 'उर्यां देखा
फिर गुलिस्ताँ में न सो-ए-गुल-ए-ख़ंदाँ देखा
इनायत अली ख़ान इनायत
ग़ज़ल
रहम कर ज़ालिम कि क्या बूद-ए-चराग़-ए-कुश्ता है
नब्ज़-ए-बीमार-ए-वफ़ा दूद-ए-चराग़-ए-कुश्ता है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ में सैर जो की हम ने जा-ए-गुल
छानी चमन की ख़ाक न था नक़्श-ए-पा-ए-गुल
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
हो जुदा ऐ चारा-गर है मुझ को आज़ार-ए-फ़िराक़
बे-विसाल अच्छा हुआ भी कोई बीमार-ए-फ़िराक़
क़लक़ मेरठी
ग़ज़ल
माह-ए-कामिल हो मुक़ाबिल यार के रू से चे-ख़ुश
ख़म हो दम मारे हिलाल उस तेग़-ए-अबरू से चे-ख़ुश
वली उज़लत
ग़ज़ल
शिकवा करूँ मैं कब तक उस अपने मेहरबाँ का
अल-क़िस्सा रफ़्ता रफ़्ता दुश्मन हुआ है जाँ का
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
लोग बैठे हैं यहाँ हाथों में ख़ंजर ले कर
तुम कहाँ आ गए ये शाख़-ए-गुल-ए-तर ले कर