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ग़ज़ल
कोई है जो शिकस्त-ए-ज़ब्त-ए-ग़म होने नहीं देता
मैं रोना चाहता हूँ और वो रोने नहीं देता
पीरज़ादा क़ासिम
ग़ज़ल
मुझे जब शान-ए-ज़ब्त-ए-ग़म दिखाने का ख़याल आया
वुफ़ूर-ए-दर्द में भी मुस्कुराने का ख़याल आया
ग़ुलाम मुस्तफा बेग साबिर बरारी
ग़ज़ल
सोज़-ए-दिल बढ़ने न पाए आँख तक ऐ ज़ब्त-ए-ग़म
आग भड़का देगा ये इस ख़ाना-ए-ख़स-पोश में
ऐमन अमृतसरी
ग़ज़ल
उन को मेरे ज़ब्त-ए-ग़म से भी गिला रह जाएगा
मुश्किलें जब ख़त्म होंगी हौसला रह जाएगा
परवीन मिर्ज़ा
ग़ज़ल
ज़ब्त-ए-ग़म है बे-क़रारी में क़रार आने का नाम
याँ वफ़ा का नाम है जाँ से गुज़र जाने का नाम
अहमद आदिल
ग़ज़ल
ज़ब्त-ए-ग़म मुश्किल है और मुश्किल है मुश्किल का जवाब
नासेह-ए-मुशफ़िक़ तिरे बस का नहीं दिल का जवाब
ज़हीर अहमद ताज
ग़ज़ल
भरी महफ़िल में ज़ब्त-ए-ग़म बा-आसानी भी करते हैं
मगर तन्हाई में अश्कों की अर्ज़ानी भी करते हैं
ख़ुर्शीद अलीग
ग़ज़ल
ज़ब्त-ए-ग़म से लाख अपनी जान पर बन आए है
हाँ मगर ये इज़्ज़त-ए-सादात तो रह जाए है