आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "isli.e"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "isli.e"
ग़ज़ल
क्या रम्ज़ जाननी है तुझे अस्ल-ए-इश्क़ की?
जो तुझ में उस बदन के सिवा है, ये इश्क़ है
इरफ़ान सत्तार
ग़ज़ल
पहले थोड़ी बहुत मोहब्बत की कि कैसी होती है
पर जब असली चेहरा देखा मैं ने तो फिर सारी की
आमिर अमीर
ग़ज़ल
तुम्हारे लब की सुर्ख़ी लअ'ल की मानिंद असली है
अगर तुम पान ऐ प्यारे न खाओगे तो क्या होगा
आबरू शाह मुबारक
ग़ज़ल
जिन्हें महरूमी-ए-तासीर ही अस्ल-ए-तमन्ना है
वो आहें और होती हैं वो नाले और होते हैं