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ग़ज़ल
गुदाज़-ए-हर्फ़-ए-नौ-गुफ़्ता यक़ीनी है मोहब्बत
तिरी बुनियाद पर शे'र-आफ़रीनी है मोहब्बत
यावर अज़ीम
ग़ज़ल
होंटों पे क़र्ज़-ए-हर्फ़-ए-वफ़ा उम्र भर रहा
मक़रूज़ था सो चुप की सदा उम्र भर रहा
अख़्तर होशियारपुरी
ग़ज़ल
गर दर-ए-हर्फ़-ए-सदाक़त ये नहीं था फिर क्यूँ
तुम ने ताला मिरे होंटों पे लगाया फिर क्यूँ
शारिब मौरान्वी
ग़ज़ल
ज़बाँ पे ग़ौग़ा-ए-हर्फ़-ए-दु'आ है कितनी देर
ये आसरा है मगर आसरा है कितनी देर
मुज़फ्फ़र अहमद मुज़फ्फ़र
ग़ज़ल
हिसार-ए-हर्फ़-ओ--हुनर तोड़ कर निकल जाऊँ
कहाँ पहुँच के ख़याल अपनी वुसअ'तों का हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
हर्फ़-ओ-अल्फ़ाज़-ओ-म’आनी के हिजाबों में न थी
बात चेहरों पर जो लिक्खी थी किताबों में न थी
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
हर्फ़-ए-आग़ाज़-ए-सदा-ए-कुन-फ़काँ था और मैं
रक़्स में सूरज था पीला आसमाँ था और मैं
सय्यद नसीर शाह
ग़ज़ल
मुद्दतों के बाद फिर कुंज-ए-हिरा रौशन हुआ
किस के लब पर देखना हर्फ़-ए-दुआ रौशन हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
वो ज़ुल्फ़ है तो हर्फ़-ए-ततार-ओ-ख़ुतन ग़लत
इस लब के होते नाम-ए-अक़ीक़-ए-यमन ग़लत