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ग़ज़ल
ढब देखे तो हम ने जाना दिल में धुन भी समाई है
'मीरा-जी' दाना तो नहीं है आशिक़ है सौदाई है
मीराजी
ग़ज़ल
रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना
कोई सूखा पेड़ मिले तो उस से लिपट के रो लेना
बशीर बद्र
ग़ज़ल
जनम जनम से है पर्वर्दा-ए-ग़म-ए-हिज्राँ
ये दाग़ दिल पे किसी 'उम्र-ए-मुख़्तसर के नहीं