aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "javaa.n-mard"
काम हिम्मत से जवाँ मर्द अगर लेता हैसाँप को मार के गंजीना-ए-ज़र लेता है
इश्क़ ने रेल की पटरी पे लिटाया जिस कोथा जवाँ-मर्द जवाँ-मर्द भी ऐसा-वैसा
शो'लों पे नंगे पाँव चला जा रहा है जोदेखो वो बुर्दबार जवाँ-मर्द कौन है
देखता हूँ तो जिगर फटने को आ जाता हैमेरे मौला कोई मा'ज़ूर जवाँ-मर्द न हो
औरों से गिला क्या हो कि ले डूबा हमें तोअंदर के जवाँ-मर्द का इज़हार न होना
ऐ जवाँ मर्द-ए-मुजाहिद नए हालात समझअब क़लम थाम ले और हाथ से नेज़ा रख दे
मुझ को आसार बताते हैं ये बस्ती है जहाँमर्द-ओ-ज़न पीर-ओ-जवाँ क़त्ल किया जाएगा
जो हुए फ़रिश्तों में मशवरे करे कौन इश्क़ की राह तयकमर अपनी बाँध के जो उठा तो 'जिगर' सा मर्द-ए-जवाँ उठा
हर ख़्वाब की ता'बीर नज़र आई हिरासाँनापैद हुआ जोश-ए-जुनूँ मर्द-ए-जवाँ में
मुद्दई ख़ुश कि है वो मर्द यगाना पैदाऔर हमें चाह करे हम सा ज़माना पैदा
क़द्र की रात बड़ी प्यारी हैदिन इसी रैन का दरबारी है
जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाहीखुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाही
नींद की गोलियाँ खा के सोता है वोरात-भर कितना मदहोश होता है वो
'मुसहफ़ी' गर तू मर्द-ए-कामिल हैदिल न रख इस जहान पर आशिक़
छूटता है हाथ से दामन अगर तदबीर कापाँव में एहसास होता है हमें ज़ंजीर का
गर्मी-ए-इश्क़ के बग़ैर लुत्फ़-ए-हयात राएगाँइश्क़ है ज़िंदगी का रूप इश्क़ से ज़िंदगी जवाँ
चश्म-ए-मिल्लत में मकीं कौन है आग़ा शोरिशगोशा-ए-दिल के क़रीं कौन है आग़ा शोरिश
चार-सू है बड़ी वहशत का समाँकिसी आसेब का साया है यहाँ
आप अब पूछने को आए हैंदिल मिरी जान मर गया कब का
तेरा कूचा है सितमगार वो काफ़िर जागहकि जहाँ मारे गए कितने मुसलमाँ यक जा
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