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ग़ज़ल
अगर है मंज़ूर ये कि होवे हमारे सीने का दाग़ ठंडा
तो आ लिपटिए गले से ऐ जाँ झमक से कर झप चराग़ ठंडा
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
निगह लड़ाई है उस ने जिस दम झटक लिया झप तो दिल को मेरे
अदा अदा ने इधर दबोचा पलक पलक ने उधर उछाला
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
हर अम्र में दुनिया के मौजूद जिधर देखो
आदम को किया हैराँ शैतान की लप-झप ने
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
ग़ज़ल
रहियो हुशियार तू लप-झप से बुताँ की 'क़ाएम'
बात की बात में वाँ दिल को उड़ा जाते हैं
क़ाएम चाँदपुरी
ग़ज़ल
लुत्फ़-ए-तशरीफ़ जो 'इश्क़ उस के ने आग़ाज़ किया
हम ने ता'ज़ीम की और झप दर-ए-दिल बाज़ किया