आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ko.D"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "ko.D"
ग़ज़ल
तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो
हज़र करो मिरे दिल से कि इस में आग दबी है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
इश्क़ तुम से हो गया तो क़ब्र अपनी खोद ली
और हम करते भी क्या फ़रहाद हो जाने के बा'द
बिलाल सहारनपुरी
ग़ज़ल
ये कोमल धरती क्या मेरे भारी दुख का बोझ सहेगी
उधर इधर लाखों दुनियाएँ क्यूँ न कोई और आँगन ढूँडूँ
बिमल कृष्ण अश्क
ग़ज़ल
गरचे वहशत का नहीं है कोई अफ़्साना जुदा
पर नज़र आता है सब से तिरा दीवाना जुदा