aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kos"
क्यूँ बख़्श दिया मुझ से गुनहगार को मौलामुंसिफ़ तो किसी से भी रिआ'यत नहीं करता
तिरे ख़याल को कुछ चुप सी लग गई वर्नाकहानियों से शब-ए-ग़म बहल तो सकती है
वस्ल होता है जिन को दुनिया मेंयारब ऐसे भी लोग होते हैं
ज़बाँ को हुक्म निगाह-ए-करम को पहचानेनिगह का जुर्म ग़ुबार-ए-अलम को पहचाने
मिज़ाज-ओ-मर्तबा-ए-चश्म-ए-नम को पहचानेजो तुझ को देख के आए वो हम को पहचाने
शायद कि मिले ज़ात के ज़िंदाँ से रिहाईदीवार को चाटा है हवाओं से लड़े हैं
आवाज़-ए-सूर सुन के कहा दिल ने क़ब्र मेंकिस की बरात आई ये बाजा किधर बजा
कड़े हैं कोस सफ़र दूर का ज़रूरी हैघरों से रिश्तों का अब ख़ात्मा ज़रूरी है
रस्ते बड़े दुश्वार थे और कोस कड़े थेलेकिन तिरी आवाज़ पे हम दौड़ पड़े थे
जू-ए-पायाब-ए-मोहब्बत में जवाहिर मत ढूँढकिसी पत्थर को समझ ले कि गुहर है ये भी
रात तो ख़ैर किसी तरह से कट जाएगीरात के बा'द कई कोस कड़े और भी हैं
वो आएँगे वो आते हैं वो आने को हैं वो आएतसव्वुर को वो बहलाएँ तसव्वुर हम को बहलाए
वहशत-ए-दिल ने किया है वो बयाबाँ पैदासैकड़ों कोस नहीं सूरत-ए-इंसाँ पैदा
मुझ बला-नोश को तलछट भी है काफ़ी साक़ीभर दे चुल्लू में जो हो शीशे में बाक़ी साक़ी
कहाँ खो गए मेरे ग़म-ख़्वार अबकि तन्हा हूँ चलने को तय्यार अब
ख़ुशी मिली न अगर मुझ को ज़ौक़-ए-ग़म तो मिलामिली न दौलत-ए-दुनिया मुझे क़लम तो मिला
शहर वो साहूकार है जिस को कोस रहा है हर कोईये सच भी सब को मालूम है दाना-पानी उस के पास
हम एहतिसाब-ए-अमल से गुरेज़-पा ही रहेन वो ग़लत है न उस का कोई इ'ताब ग़लत
कुछ नज़ारे हैं कुछ नज़र बाक़ीऔर कुछ कोस का सफ़र बाक़ी
मौत ही चारा-साज़-ए-फुर्क़त हैरंज मरने का मुझ को राहत है
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