आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "kurede"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "kurede"
ग़ज़ल
मेरी पहचान तो मुश्किल थी मगर यारों ने
ज़ख़्म अपने जो कुरेदे हैं तो पाया है मुझे
अहमद नदीम क़ासमी
ग़ज़ल
क्यूँ आ के हर इक शख़्स मिरे ज़ख़्म कुरेदे
क्यूँ मैं भी हर इक शख़्स को हाल अपना सुनाऊँ
अतहर नफ़ीस
ग़ज़ल
मुद्दत से कुरेदे भी नहीं याद किसी की
फिर ज़ख़्म मिरे सीने के भर क्यों नहीं जाते
पंडित विद्या रतन आसी
ग़ज़ल
ज़िंदगी भर पै-ब-पै हम ने कुरेदे अपने ज़ख़्म
हम से छुट कर उस पे क्या गुज़री ये सोचा ही नहीं
अजमल अजमली
ग़ज़ल
चुभो दिए हैं दिलों में जो ख़ार-ए-ग़म तुम ने
उन्हीं से ज़ख़्म कुरेदे वफ़ा-शिआ'रों ने
सलाहुद्दीन फ़ाइक़ बुरहानपुरी
ग़ज़ल
राख के ढेर हैं हम कौन कुरेदे हम को
लाख हम अहल-ए-वफ़ा आतिश-ए-पिन्हाँ में जलें
सय्यद मोहम्मद अहमद नक़वी
ग़ज़ल
छुपा लेते हैं अपनी आँख के आँसू क़रीने से
कुरेदे जाने पर ही दर्द हम अपना बताते हैं
लोकेश त्रिपाठी
ग़ज़ल
वक़्त की कोख से इक 'उम्र के लम्हे निकले
जब कुरेदे गए लम्हे तो ज़माने निकले
धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़
ग़ज़ल
मिरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे
ये चराग़ फिर भी चराग़ है कहीं तेरा हाथ जला न दे
बशीर बद्र
ग़ज़ल
जिस पे होता ही नहीं ख़ून-ए-दो-आलम साबित
बढ़ के इक दिन उसी गर्दन में हमाइल हो जाओ