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ग़ज़ल
महाज़-ए-ज़िंदगी के हर मुहारिब से लड़ो साहब
कभी आगे बढ़ो साहब कभी पीछे हटो साहब
सय्यद तम्जीद हैदर तम्जीद
ग़ज़ल
ज़ियादा दिल की लॉरी में ग़मों का बोझ मत लादो
मिरे सब्र-ओ-तहम्मुल की कमानी टूट जाएगी
एख़लाक़ अहमद एख़लाक़
ग़ज़ल
आतिश-ए-रश्क से अग़्यार जले जाते हैं
मुझ से छींटें न लड़ो मुश्फ़िक़-ए-मन पानी में