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ग़ज़ल
अरिनी ओ लन-तरानी का सब राज़ खुल गया
क्या नश्शा-ए-ग़रीब है शर्ब-उल-यहूद में
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
ग़ज़ल
कुछ तबस्सुम ज़ेर-ए-लब पर शर्म दामन-गीर है
उफ़ ये किस आलम में खिंचवाई हुई तस्वीर है
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
लन-तरानी जल्वा-ए-जानाँ तिरी अच्छी नहीं
मैं कोई मूसा नहीं हूँ तूर की बातें न कर
मुज़्तर ख़ैराबादी
ग़ज़ल
वक़्फ़ कर के ज़िंदगी की साअ'तें तेरे लिए
अपने सर लीं मैं ने क्या क्या आफ़तें तेरे लिए
बिस्मिल सईदी
ग़ज़ल
ला'ल-ए-जाँ-बख़्श उस के थे पोशीदा जूँ आब-ए-हयात
अब तो कोई कोई इन होंठों पे मर जाने लगा
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
इश्क़ में अहल-ए-वफ़ा कितने अज़िय्यत-कोश हैं
ख़ून दिल का हो रहा है लब मगर ख़ामोश हैं
फ़ना बुलंदशहरी
ग़ज़ल
वुफ़ूर-ए-शौक़ मेरा माने-ए-दीदार था वर्ना
झलक थी ख़ुद-नुमाई की सदा-ए-लन-तरानी में