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ग़ज़ल
लिटा के सीने पे चंचल को प्यार से हर-दम
मैं गुदगुदाता था हँस हँस वो ज़ोफ़ खोता था
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
ये तो छपर-खट छोटा सा है पहलू में तुम सोओगे क्यूँकर
आओ लिटा लें सीने पर हम तुम को सुला लें छाती पर हम
अहमद हुसैन माइल
ग़ज़ल
क्या क्या फ़ित्ने सर पर उस के लाता है माशूक़ अपना
जिस बे-दिल बे-ताब-ओ-तवाँ को इश्क़ का मारा जाने है