आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "libaas-e-ma.aanii"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "libaas-e-ma.aanii"
ग़ज़ल
सोज़-ए-'मानी' का ज़माने में है किस को एहसास
आज फिर दर्द मिरे पहलू में बेकार उठा
सुलैमान अहमद मानी
ग़ज़ल
चश्म-ए-साक़ी से गिरा जाता है ज़र्फ़-ए-मय-कशाँ
तोड़ दें साग़र जिन्हें एहसास-ए-बेश-ओ-कम हुआ
मानी नागपुरी
ग़ज़ल
ऐ बज़्म-ए-सुख़न तेरा ऐसे में ख़ुदा-हाफ़िज़
पलकें वो झुकी सी हैं 'मानी' भी ग़ज़ल-ख़्वाँ है
मानी नागपुरी
ग़ज़ल
हिस-ए-बासिरा को 'मानी' जो समीअ'-ए-कैफ़ कर दे
वो सुख़न-तराज़ नर्गिस है कहीं ज़बाँ से आगे
मानी नागपुरी
ग़ज़ल
'मानी' कह दो शाइ'री-जुज़वेस्त-अज़-पैग़म्बरी
हम प-ए-तब्लीग़ मुल्क-ए-दिलबरी में आ गए