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ग़ज़ल
यद-ए-बैज़ा की तू है मालकिन ऐ सफ़ेद संग की मूर्ती
तिरी आँख दरिया-ए-नील है मिरी रात कोई निकाल भी
तनवीर मोनिस
ग़ज़ल
अमीर ख़ुसरो
ग़ज़ल
ख़ुद-ब-ख़ुद नींद सी आँखों में घुली जाती है
महकी महकी है शब-ए-ग़म तिरे बालों की तरह
जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़ल
शाद अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
अहमद सलमान
ग़ज़ल
यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग
यूँ फ़ज़ा महकी कि बदला मिरे हमराज़ का रंग