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ग़ज़ल
गुलों में रंग नहीं मौसम-ए-बहार नहीं
मिरी हयात मगर फिर भी सोगवार नहीं
सुरय्या सुल्ताना नसीम नियाज़ी
ग़ज़ल
ज़िंदगी के दश्त में आया न जब अक्स-ए-बहार
मैं ने ख़ुद को ख़ुद दिखाया वहशतों का सिलसिला