आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mutribo"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "mutribo"
ग़ज़ल
मुतरिबो बा-साज़ आओ तुम हमारी बज़्म में
साज़-ओ-सामाँ से तुम्हारी इतनी साज़िश और है
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
पस-ए-तौबा हदीस-ए-मुतरिब-ओ-पैमाना कहते हैं
ये इक भूला हुआ पर आज हम अफ़्साना कहते हैं
मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी
ग़ज़ल
मुतरिब से ये कहता था 'हश्र' अपनी ग़ज़ल सुन कर
है मेरी जवानी का भूला हुआ अफ़्साना
आग़ा हश्र काश्मीरी
ग़ज़ल
मुतरिब-ए-दिल ने मिरे तार-ए-नफ़स से 'ग़ालिब'
साज़ पर रिश्ता पए नग़्मा-ए-'बेदिल' बाँधा