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ग़ज़ल
आख़िर उस के हुस्न की मुश्किल को हल मैं ने किया
एक नसरी नज़्म थी जिस को ग़ज़ल मैं ने किया
फ़रहत एहसास
ग़ज़ल
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
तमाम आ'साब पर तारी है नसरी नज़्म दुनिया की
मगर 'एहसास'-साहब की ग़ज़ल-ख़्वानी नहीं जाती
फ़रहत एहसास
ग़ज़ल
यार तिरी वो नसरी चिंता तू ने सुनाई सब ने सुनी
कौन सुनेगा जब मैं छेड़ूँगा अपने आहंग के दुख
विक्रम
ग़ज़ल
नसरी नज़्में कहने वाले तो फ़रिश्ते हैं तमाम
मुझ गुनहगार-ए-ग़ज़ल पर क़हर उतरता और कुछ
काविश बद्री
ग़ज़ल
नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गया
क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया
मीराजी
ग़ज़ल
उंसुर है ख़ैर ओ शर का हर इक शय में यूँ निहाँ
हर शम'-ए-बज़्म नूरी-ओ-नारी है जिस तरह
नातिक़ लखनवी
ग़ज़ल
मुलाइम पेट मख़मल सा कली सी नाफ़ की सूरत
उठा सीना सफ़ा पेड़ू अजब जोबन की नारी है
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
नस्र में जो कुछ कह नहीं सकता शेर में कहता हूँ
इस मुश्किल में भी मुझ को आसानी होती है
अफ़ज़ल ख़ान
ग़ज़ल
वो फूल था जादू-नगरी में जिस फूल की ख़ुश्बू भाई थी
उसे लाना जान गँवाना था और अपनी जान पराई थी
साबिर वसीम
ग़ज़ल
देखा न तुझे ऐ रब हम ने हाँ दुनिया तेरी देखी है
सड़कों पर भूके बच्चे भी कोठे पर अब्ला नारी भी
आज़िम कोहली
ग़ज़ल
बाग़बानों को बताओ गुल-ओ-नस्रीं से कहो
इक ख़राब-ए-गुल-ओ-नसरीन-ए-बहार आ ही गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
आँख पड़ती है हर इक अहल-ए-नज़र की तुम पर
तुम में रूप ऐ गुल ओ नसरीन ओ समन किस का है