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ग़ज़ल
किस नगीं पर हैं तिरे नक़्श के आसार ‘अयाँ
नोट-बुक तेरी शिकस्ता तिरी पेंसिल है घुनी
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल
मिरे दस्त-ए-जुनूँ की फ़ित्ना-सामानी को क्या कहिए
कि इक आलम परेशाँ है परेशानी को क्या कहिए
हसरत सहरवर्दी
ग़ज़ल
तिरे अक्स से मिरी ज़ात में है लतीफ़ हिज्र-ओ-विसाल सा
दम-ए-सुब्ह कोई उमंग सी सर-ए-शाम कोई मलाल सा
नैना आदिल
ग़ज़ल
सिर्फ़ इक लर्ज़िश है नोक-ए-ख़ार पर शबनम की बूँद
फिर भी इस फ़ुर्सत पर उस की मुझ को रश्क आ जाए है
नियाज़ फ़तेहपुरी
ग़ज़ल
कोई तो हो जो उस को रोकने का मो'जिज़ा करे
या हो रहा है जो वो कोई ख़्वाब हो ख़ुदा करे
अनुराग अर्श
ग़ज़ल
सुकूँ पाया तबीअ'त ने न दिल को ही क़रार आया
जो आँसू आँख में आया बड़ा बे-ए'तिबार आया
जुंबिश ख़ैराबादी
ग़ज़ल
इक बरहमन ने कहा है मेरे हाल-ए-ज़ार पर
हो के मोमिन मर रहा है क्यूँ बुत-ए-पिंदार पर
बिलाल सहारनपुरी
ग़ज़ल
क़रार पर न मिलो इज़्तिराब हो कि न हो
शराब ग़ैर को दो दिल कबाब हो कि न हो
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
ग़ज़ल
पलकें नींद से बोझल हैं या अब मंज़र की ताब नहीं
क्यों इन जलती आँखों में अब रंग-बिरंगे ख़्वाब नहीं
फ़ैसल अज़ीम
ग़ज़ल
दिल छोड़ के हर राहगुज़र ढूँढ रहा हूँ
बैठे हैं कहाँ वो मैं किधर ढूँढ रहा हूँ