आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "order"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "order"
ग़ज़ल
मुजरिम हैं अगर हम ने तिरा नाम लिया है
हम ने तो फ़क़त शिकवा-ए-हालात किया है
इंद्र सुरूप दत्त नादान
ग़ज़ल
जिस क़दर भी ज़हर दिल में था ज़बाँ पर आ गया
उस के लब खुलते ही गोया साँप सा लहरा गया
इंद्र सुरूप दत्त नादान
ग़ज़ल
माना कि बहुत ख़ूब है उस पार का मंज़र
जाता है मगर आग के दरिया से गुज़र कर
इंद्र सुरूप दत्त नादान
ग़ज़ल
फिर बन-बास का मौसम आया फिर तहज़ीब के पंख जले
फिर इंसान की मिट्टी सोई फिर बन-मानुस जाग उठे