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ग़ज़ल
हुस्न के जाने कितने चेहरे हुस्न के जाने कितने नाम
इश्क़ का पेशा हुस्न-परस्ती इश्क़ बड़ा हरजाई है
जौन एलिया
ग़ज़ल
वहशत-ए-दिल से फिरना है अपने ख़ुदा से फिर जाना
दीवाने ये होश नहीं ये तो होश-परस्ती है
फ़ानी बदायुनी
ग़ज़ल
हम से खुल जाओ ब-वक़्त-ए-मय-परस्ती एक दिन
वर्ना हम छेड़ेंगे रख कर उज़्र-ए-मस्ती एक दिन
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
शुग़्ल-ए-मय-परस्ती गो जश्न-ए-ना-मुरादी था
यूँ भी कट गए कुछ दिन तेरे सोगवारों के
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
ये साक़ी की करामत है कि फ़ैज़-ए-मय-परस्ती है
घटा के भेस में मय-ख़ाने पर रहमत बरसती है
बेदम शाह वारसी
ग़ज़ल
आमिर उस्मानी
ग़ज़ल
'शाद' न वो दीदार-परस्ती और न वो बे-नश्शा की मस्ती
तुझ को कहाँ से ढूँढ के लाएँ उफ़ री जवानी हाए ज़माने