आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "parbato.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "parbato.n"
ग़ज़ल
पर्बतों पर सुब्ह की सी धूप हूँ मैं इन दिनों
जानता हूँ अब ढलानों पर फिसलना है मुझे
स्वप्निल तिवारी
ग़ज़ल
'बशर' बे-रहम हैं ये पर्बतों जैसे उसूल अपने
किसी के दिल की वादी में उतरने ही नहीं देते
चरण सिंह बशर
ग़ज़ल
ये हिन्दोस्तान है याँ पर्बतों का रोज़ मेला है
ख़ुदा जाने वो बुत ऐ 'मेहर' देबी है कि दुर्गा है