aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "parveen"
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भीदिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई कीउस ने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगामसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दियाइश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझ को निढाल कर दिया
पूरा दुख और आधा चाँदहिज्र की शब और ऐसा चाँद
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगीमैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी
अक्स-ए-ख़ुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोईऔर बिखर जाऊँ तो मुझ को न समेटे कोई
हम ने ही लौटने का इरादा नहीं कियाउस ने भी भूल जाने का वा'दा नहीं किया
अब भला छोड़ के घर क्या करतेशाम के वक़्त सफ़र क्या करते
अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँइक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ
टूटी है मेरी नींद मगर तुम को इस से क्याबजते रहें हवाओं से दर तुम को इस से क्या
बहुत रोया वो हम को याद कर केहमारी ज़िंदगी बरबाद कर के
तेरी ख़ुश्बू का पता करती हैमुझ पे एहसान हवा करती है
बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखनामैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना
गए मौसम में जो खिलते थे गुलाबों की तरहदिल पे उतरेंगे वही ख़्वाब अज़ाबों की तरह
हर्फ़-ए-ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता हैबाब इक और मोहब्बत का खुला चाहता है
काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिनतितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा
धनक धनक मिरी पोरों के ख़्वाब कर देगावो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा
रस्ता भी कठिन धूप में शिद्दत भी बहुत थीसाए से मगर उस को मोहब्बत भी बहुत थी
बारिश हुई तो फूलों के तन चाक हो गएमौसम के हाथ भीग के सफ़्फ़ाक हो गए
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