आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "piir-e-josh-e-shabaab"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "piir-e-josh-e-shabaab"
ग़ज़ल
तबीअत-ए-बे-नियाज़-ए-जोश-ए-वहशत हो तो सकती है
जो तुम चाहो तो बेहतर मेरी हालत हो तो सकती है
मैकश बदायुनी
ग़ज़ल
मरकज़-ए-जोश-ए-जुनूँ 'अक़्ल की तनवीर भी था
वो मिरा ख़्वाब मिरे ख़्वाब की ता'बीर भी था
काैसर परवीन काैसर
ग़ज़ल
लबों पर आ चुका दम कोई दम की ज़िंदगानी है
चल उठ ओ बेवफ़ा पहलू से अब क्यूँ मेहरबानी है