आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "piir-e-mugaa.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "piir-e-mugaa.n"
ग़ज़ल
जिगर बरेलवी
ग़ज़ल
हम जो मस्जिद से दर-ए-पीर-ए-मुग़ाँ तक पहुँचे
बढ़ के ये बात ख़ुदा जाने कहाँ तक पहुँचे
साहिर सियालकोटी
ग़ज़ल
रिंदों में यूँ ही बख़्शिश-ए-पीर-ए-मुग़ाँ रहे
हो लाख क़हत फिर भी ये दरिया रवाँ रहे
अब्दुस्सलाम नदवी
ग़ज़ल
जो हम आए तो बोतल क्यूँ अलग पीर-ए-मुग़ाँ रख दी
पुरानी दोस्ती भी ताक़ पर ऐ मेहरबाँ रख दी
रियाज़ ख़ैराबादी
ग़ज़ल
रहा करते हैं मय-ख़ानों में हम पीर-ए-मुग़ाँ हो कर
तबीअत ज़िंदा-दिल रखती है पीरी में जवाँ हो कर
मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी
ग़ज़ल
जुरअत हो तो पूछे ये कोई पीर-ए-मुग़ाँ से
खिंचती है कहाँ आती है बोतल में कहाँ से
बिस्मिल अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
याँ बादा-ए-अहमर के छलकते हैं जो साग़र
ऐ पीर-ए-मुग़ाँ देख कि है सारी दुकाँ सुर्ख़