aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "pulanda"
अपनी हयात-ए-इश्क़ पे डालें अगर नज़रना-ख़ुश-गवारियों का पुलंदा दिखाई दे
न कोई शक्ल ही उभरी न कोई ख़ाका बनातमाम शे'रों से काग़ज़ का इक पुलंदा बना
समुंदर को नहीं है मुआ'फ़ करनागुनाहों का पुलंदा छोड़ता है
पड़ा हुआ हूँ पुलंदा सा अपने सामने मैंऔर इस पुलंदे के पुर्ज़े उड़ाता रहता हूँ
उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआअब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुम नेक्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो
'दाग़' को यूँ वो मिटाते हैं ये फ़रमाते हैंतू बदल डाल हुआ नाम पुराना तेरा
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने मेंएक पुराना ख़त खोला अनजाने में
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता हैतेरे आगे चाँद पुराना लगता है
आँखें मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम-ए-मयसाक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही सही
फटा-पुराना ख़्वाब है मेरा फिर भी 'ताबिश'इस में अपना-आप छुपाया जा सकता है
नए किरदार आते जा रहे हैंमगर नाटक पुराना चल रहा है
नम की तर्सील से आँखों की हरारत कम होसर्द-ख़ानों में कोई ख़्वाब पुराना न पड़े
जिस की गर्दन में है फंदा वही इंसान बड़ासूलियों से यहाँ पैमाइश-ए-क़द होती है
बदल रहे हैं कई आदमी दरिंदों मेंमरज़ पुराना है इस का नया इलाज भी हो
'नासिर' तेरा मीत पुरानातुझ को याद तो आता होगा
तक़ाज़ा वक़्त का कुछ भी हो ये दिलवही क़िस्सा पुराना चाहता है
याद कर के मुझे तकलीफ़ ही होती होगीएक क़िस्सा हूँ पुराना सा भुला दे मुझ को
हर साल नए पत्ते बदल देते हैं तेवरबूढ़ा है मगर पेड़ पुराना नहीं लगता
अपने ग़म को गीत बना कर गा लेनाराग पुराना तेरा भी है मेरा भी
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