आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "pusht-e-kham"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "pusht-e-kham"
ग़ज़ल
ब-क़द्र-ए-ज़ौक़-ए-तलब मय अता हो रिंदों को
ये मै-कदा है यहाँ रस्म-ए-बेश-ओ-कम क्यों हो
मजीद खाम गानवी
ग़ज़ल
अफ़्सोस की भी चश्म थी उन से ख़िलाफ़-ए-अक़्ल
बार-ए-इलाक़ा से तो 'अबस पुश्त-ए-ख़म हुआ
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
'नज़ीर' पीर हुआ तो भी बार-ए-नाज़-ए-बुताँ
कुछ उस के दोश के कुछ पुश्त-ए-ख़म के साथ रहा
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
वो इल्तिमास-ए-लज्ज़त-ए-बे-दाद हूँ कि मैं
तेग़-ए-सितम को पुश्त-ए-ख़म-ए-इल्तिजा करूँ
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
हम से मिल के फ़ितरत के पेच-ओ-ख़म को समझोगे
हम जहान-ए-फ़ितरत का इक सुराग़ हैं यारो
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
जो तिरी महफ़िल से ज़ौक़-ए-ख़ाम ले कर आए हैं
अपने सर वो ख़ुद ही इक इल्ज़ाम ले कर आए हैं
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
ये सस्ती लज़्ज़तों सस्ती सियासत के पुजारी हैं
हमें अहबाब का सौदा-ए-ख़ाम अच्छा नहीं लगता
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
है आज और ही कुछ ज़ुल्फ़-ए-ताबदार में ख़म
भटकने वाले को मंज़िल का रास्ता तो मिला
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
ख़िश्त पुश्त-ए-दस्त-ए-इज्ज़ ओ क़ालिब आग़ोश-ए-विदा'अ
पुर हुआ है सैल से पैमाना किस ता'मीर का
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
कजी ऐ 'मशरिक़ी' हो दूर क्यूँ कर कज-मिज़ाजों की
नहीं मुमकिन कि पुश्त-ए-आसमान-ए-पीर सीधी हो