आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "qaatil-bin"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "qaatil-bin"
ग़ज़ल
वो क्या दिन थे जो क़ातिल-बिन दिल-ए-रंजूर रो देता
मिरा हर ज़ख़्म जूँ वो तेग़ होती दूर, रो देता
वली उज़लत
ग़ज़ल
क़ातिल से गर न मिलिए तो 'जुरअत' हमारी क्या
जूँ गुल शगुफ़्ता हो न कोई ज़ख़्म खाए बिन
जुरअत क़लंदर बख़्श
ग़ज़ल
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
कैसे कैसे भेद छुपे हैं प्यार भरे इक़रार के पीछे
कोई पत्थर तान रहा है शीशे की दीवार के पीछे
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
हसीन और उस पे ख़ुद-बीं वो सितम-गर यूँ भी है यूँ भी
नज़ारा क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत से बाहर यूँ भी है यूँ भी
क़ैसर हैदरी देहलवी
ग़ज़ल
दिन हँस के न जो गुज़रे वो रो के गुज़ारे हैं
जैसे भी हुआ सर से कुछ बोझ उतारे हैं
सीमाब सुल्तानपुरी
ग़ज़ल
'क़तील' अब दिल की धड़कन बन गई है चाप क़दमों की
कोई मेरी तरफ़ आता हुआ महसूस होता है
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
जो कुछ कि तू ने सर पे मिरे दिलरुबा किया
दिल ही वो जानता है कहूँ क्या मैं क्या किया
मिर्ज़ा जवाँ बख़्त जहाँदार
ग़ज़ल
सुन फ़स्ल-ए-गुल ख़ुशी हो गुलशन में आइयाँ हैं
क्या बुलबुलों ने देखो धूमें मचाइयाँ हैं