आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "qafas-e-hal"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "qafas-e-hal"
ग़ज़ल
हैं किसी इशारे के मुंतज़िर कई शहसवार खड़े हुए
कि हो गर्म फिर कोई मा'रका मिरे ज़ब्त-ए-हाल के दरमियाँ
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
अगर ज़बाँ से बयाँ हाल-ए-ग़म न हो पाया
हुज़ूर-ए-दोस्त मिरी ख़ामुशी ने साथ दिया
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
नरेश एम. ए
ग़ज़ल
मिरी हमसरी का ख़याल क्या मिरी हम-रही का सवाल क्या
रह-ए-इश्क़ का कोई राह-रौ मिरी गर्द को भी न पा सका
नरेश एम. ए
ग़ज़ल
बुतों की बंदगी है शुक्रिया साने' की सन'अत का
वो काफ़िर क्यों हुआ जिस को ये दिलबर याद आते हैं
ए. डी. अज़हर
ग़ज़ल
जाने तू क्या ढूँढ रहा है बस्ती में वीराने में
लैला तो ऐ क़ैस मिलेगी दिल के दौलत-ख़ाने में
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
लोग हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर पल में माह-ए-तमाम हुए
हम हर बुर्ज में घटते घटते सुब्ह तलक गुमनाम हुए
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
पुर्सान-ए-हाल कब हुई वो चश्म-ए-बे-नियाज़
जब भी गिरे हैं ख़ुद ही सँभलते रहे हैं हम