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ग़ज़ल
बुरे अच्छे हों जैसे भी हों सब रिश्ते यहीं के हैं
किसी को साथ दुनिया से कोई ले कर नहीं जाता
वसीम बरेलवी
ग़ज़ल
गाँठ अगर लग जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है
हस्तीमल हस्ती
ग़ज़ल
आले रज़ा रज़ा
ग़ज़ल
जौन एलिया
ग़ज़ल
उस ने मेरी राह न देखी और वो रिश्ता तोड़ लिया
जिस रिश्ते की ख़ातिर मुझ से दुनिया ने मुँह मोड़ लिया
वसीम बरेलवी
ग़ज़ल
टूटते जाते हैं रिश्ते जोड़ता जाता हूँ मैं
एक मुश्किल कम हुई और एक मुश्किल आ गई