आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "rum"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "rum"
ग़ज़ल
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
ग़ज़ल जब ताज़ा कहता हूँ पुरानी भूल जाता हूँ
फ़साना लिखने बैठूँ तो कहानी भूल जाता हूँ
शाह रूम ख़ान वली
ग़ज़ल
उस को तन्हा पा के 'असलम' रात अपने रूम में
क़तरा-ए-ख़ून-ए-हवस आँखों में आया क्यूँ नहीं
असलम आज़ाद
ग़ज़ल
वाक़ई बोलने से अपने लड़ा बैठे जो आँख
क्यूँ ख़ुदी से न करे फेर वो रम या माबूद