aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ruqa"
देखा जो कुछ रुका मुझे तो किस तपाक सेगर्दन में मेरी डाल दिए आप आ के हाथ
बस इतना होश है मुझ को कि अजनबी हैं सबरुका हुआ हूँ सफ़र में किसी दयार में हूँ
हाए अंदाज़ तेरे रुकने कावक़्त को भी रुका रुका देखा
आवाज़ दे रहा है मुझे कौन बार बारकिस के लिए रुका हूँ मुझे कुछ नहीं पता
कभी रुका नहीं कोई मक़ाम-ए-सहरा मेंकि टीले पाँव-तले से सरकते रहते हैं
आँसू जो रुका वो किश्त-ए-जाँ मेंबारिश की मिसाल आ गया है
अपने हमराह ख़ुद चला करनाकौन आएगा मत रुका करना
वो दर्द जो लम्हा भर रुका थामुज़्दा कि बहाल हो गया है
कुछ लिखा है तुझे हर बर्ग पे ऐ रश्क-ए-बहाररुक़आ वारें हैं ये औराक़-ए-ख़िज़ानी उस की
हर साल ज़र्द फूलों का इक क़ाफ़िला रुकाउस ने जहाँ पे धूल अटे पाँव धोए थे
रुका जो काम तो दीवानगी ही काम आईन काम आए तो फ़र्ज़ानगी को क्या कीजे
जैसे ग़लत पते पे चला आए कोई शख़्ससुख ऐसे मेरे दर पे रुका और गुज़र गया
गाम-ब-गाम इक बहिश्त और वो उस की एक हश्तराह में भी रुका नहीं और न अपने घर गया
रुका न ज़ुल्म मिरे राख बनने पर भी 'रियाज़'हुआ की ख़ू तो वही है मुझे जला कर भी
अपना भी मुद्दतों से है रुक़आ लगा हुआबिल्क़ीस-ए-शाइरी को सुलैमान चाहिए
रुका महफ़िल में इतनी देर तक मैंउजालों का बुढ़ापा देख आया
न उस को भूल पाए हैं न हम ने याद रक्खा हैदिल-ए-बर्बाद को इस तरह से आबाद रक्खा है
यूँही रुका था दम लेने को तुम ने क्या समझाहार नहीं मानी थी बस सुस्ताने बैठा था
लिखते रुक़ा लिखे गए दफ़्तरशौक़ ने बात क्या बढ़ाई है
रुका रुका तिरे लब पर अजब सुख़न था कोईतिरी निगह भी जिसे ना-तमाम छोड़ गई
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