आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ruuh-e-ravaa.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "ruuh-e-ravaa.n"
ग़ज़ल
क्या त'अज्जुब कि मिरी रूह-ए-रवाँ तक पहुँचे
पहले कोई मिरे नग़्मों की ज़बाँ तक पहुँचे
जिगर मुरादाबादी
ग़ज़ल
रूह-ए-रवान-ए-नग़्मा तुम नग़्मों का सोज़-ओ-साज़ मैं
जान-ए-ख़याल-ओ-ख़्वाब तुम जान-ए-जहान-ए-नाज़ मैं
बहज़ाद लखनवी
ग़ज़ल
रौनक़ ही नहीं उस की हम रूह-ओ-रवाँ भी हैं
लेकिन हमें दुनिया की ख़ातिर पे गराँ भी हैं
अख्तर लख़नवी
ग़ज़ल
मोहब्बत का रग-ओ-पै में मिरी रूह-ए-रवाँ होना
मुबारक हर नफ़स को इक हयात-ए-जावेदाँ होना
अलीम अख़्तर मुज़फ़्फ़र नगरी
ग़ज़ल
किसी बर्क़-ए-तजल्ली पर ज़रा सा ग़ौर कर लेना
अगर ये जानना हो आलम-ए-रूह-ए-रवाँ क्या था
जगत मोहन लाल रवाँ
ग़ज़ल
मैं कब हूँ ये मिरा तन-ए-बे-जाँ हज़र में है
रूह-ए-रवान-ए-क़ालिब-ए-तन तो सफ़र में है
रंजूर अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
ज़रा दूर और है ऐ कश्ती-ए-उम्र-ए-रवाँ साहिल
कि इस बहर-ए-जहाँ में हर नफ़स है बादबाँ मेरा
जगत मोहन लाल रवाँ
ग़ज़ल
छोड़ना घर बार का है मूजिब-ए-आवारगी
जिस्म-ए-बे-जाँ ख़ाक में रूह-ए-रवाँ चक्कर में है
सिराज मीर ख़ान साहब सहर
ग़ज़ल
पा-ब-ज़ंजीर सही ज़मज़मा-ख़्वाँ हैं हम लोग
महफ़िल-ए-वक़्त तिरी रूह-ए-रवाँ हैं हम लोग
उबैदुल्लाह अलीम
ग़ज़ल
सुख़न की बज़्म पे मौक़ूफ़ कुछ नहीं 'तालिब'
रहे हैं रूह-ए-रवाँ हम जिस अंजुमन में रहे
इसमाइल खान तालिब
ग़ज़ल
निकल के जिस्म से आँखों में आ के ठहरी है
हमारी रूह-ए-रवाँ किस के इंतिज़ार में है