आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "saag"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "saag"
ग़ज़ल
ग़ौर से देखते हैं तौफ़ को आहु-ए-हरम
क्या कहें उस के सग-ए-कूचा के क़ुर्बां होंगे
मोमिन ख़ाँ मोमिन
ग़ज़ल
मुझे रहम आता है ऐसों पर बसर अपने करते हैं वक़्त जो
किसी फल से या किसी फूल से किसी पात से किसी साग से
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
ग़ज़ल
मोहज़्ज़ब दोस्त आख़िर हम से बरहम क्यूँ नहीं होंगे
सग-ए-इज़हार को हम भी तो खुल्ला छोड़ देते हैं
शुजा ख़ावर
ग़ज़ल
सब के चूल्हे अलग-अलग हैं जब से अम्माँ गुज़री हैं
उजड़े चौके से आती है अम्माँ वाले साग की ख़ुशबू
मधूरिमा सिंह
ग़ज़ल
हिर्स-ओ-हवा की इस दुनिया से बच के रहो तो अच्छा है
बेहतर है शीराज़ की दावत से बस रूखी रोटी साग