आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "saale"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "saale"
ग़ज़ल
कहीं ख़ून-ए-दिल से लिखा तो था तिरे साल-ए-हिज्र का सानेहा
वो अधूरी डाइरी खो गई वो न-जाने कौन सा साल था
ऐतबार साजिद
ग़ज़ल
दिल में ख़ेमा-ज़न अंधेरो कितनी जल्दी में है सूरज
जिस्म तक जागे नहीं हैं और साए ढल रहे हैं
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ग़ज़ल
तेरी शक्ल के एक सितारे ने पल भर सरगोशी की
शायद माह-ओ-साल-ए-वफ़ा की बस इतनी मज़दूरी थी
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ग़ज़ल
हैं दहन ग़ुंचों के वा क्या जाने क्या कहने को हैं
शायद उस को देख कर सल्ले-अला कहने को हैं
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
हो गई मख़्मसा-ए-क़हत-ओ-गिरानी में कमी
शुक्र है साल-ए-गुज़िश्ता से ये साल अच्छा है