आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sail-e-aah"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "sail-e-aah"
ग़ज़ल
अमानत मोहतसिब के घर शराब-ए-अर्ग़वाँ रख दी
तो ये समझो कि बुनियाद-ए-ख़राबात-ए-मुग़ाँ रख दी
साइल देहलवी
ग़ज़ल
ऐ ख़ुदा शिकवा नहीं 'साइल' को तेरी ज़ात से
माँ मिरी को बख़्श दे तू तुझ से है बस ये दुआ
शहज़ाद हुसैन साइल
ग़ज़ल
समो न तारों में मुझ को कि हूँ वो सैल-ए-नवा
जो ज़िंदगी के लब-ए-मो'तबर से निकलेगा