आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sar-e-aa.ina"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "sar-e-aa.ina"
ग़ज़ल
वो जो महव थे सर-ए-आइना पस-ए-आइना भी तो देखते
कभी रौशनी में वो तीरगी को छुपा हुआ भी तो देखते
नजमा ख़ान
ग़ज़ल
ऐ 'अना' तुम मत गिराना अपने ही किरदार को
उन को कहने दो कि ख़ुद-दारी कहाँ आ गई
नफ़ीसा सुल्ताना अंना
ग़ज़ल
उस के चेहरे पे नुमायाँ हैं मिरे हिज्र के दाग़
अल्लाह रखे उसे कैसे सर-ए-आईना गई