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ग़ज़ल
'असद' हम वो जुनूँ-जौलाँ गदा-ए-बे-सर-ओ-पा हैं
कि है सर-पंजा-ए-मिज़्गान-ए-आहू पुश्त-ख़ार अपना
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
आग़ाज़-ए-मोहब्बत है और दिल यूँ हाथ से निकला जाता है
जैसे किसी अल्हड़ का आँचल सरका जाए ढलका जाए
नुशूर वाहिदी
ग़ज़ल
हम 'आरज़ू' आए बैठे हैं और वो शरमाए बैठे हैं
मुश्ताक़-नज़र गुस्ताख़ नहीं पर्दा सरकाना क्या जाने
आरज़ू लखनवी
ग़ज़ल
मुँह से पल्ला क्या सरकाना इस बादल में बिजली है
सूझती है ऐसी ही नहीं जो फूटने वाली आँखें हैं
आरज़ू लखनवी
ग़ज़ल
दिल-ए-सीपारा को ले टाँक तावीज़ों में हैकल के
न सरका ये हमाइल ऐ बुत-ए-बे-पीर पहलू से