aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sayed mohammad asar"
तेरे आने का एहतिमाल रहामरते मरते यही ख़याल रहा
'असर' कीजिए क्या किधर जाइएमगर आप ही से गुज़र जाइए
नाला करना कि आह करनादिल में 'असर' उस के राह करना
हम ग़लत एहतिमाल रखते थेतुझ से क्या क्या ख़याल रखते थे
तेरे वादों का ए'तिबार किसेगो कि हो ताब-ए-इंतिज़ार किसे
ग़म को बाहम बहम न कीजेगर ग़म है तो ग़म का ग़म न कीजे
ज़ीस्त होनी तअज्जुबात है अबमर ही जाना बस एक बात है अब
जो बात है तेरी सो निरालीउश्शाक़-कुशी नई निकाली
तू मिरी जान गर नहीं आतीज़ीस्त होती नज़र नहीं आती
लोग कहते हैं यार आता हैदिल तुझे ए'तिबार आता है
दिल में सौ आरमान रखता हूँप्यारे आख़िर मैं जान रखता हूँ
कर के दिल को शिकार आँखों मेंघर करे है तू यार आँखों में
कीधर की ख़ुशी कहाँ की शादीजब दिल से हवस ही सब उड़ा दी
कभू हम से भी वफ़ा कीजिएगाया यही जौर-ओ-जफ़ा कीजिएगा
'असर' अब तक फ़रेब खाता हैतेरी बातों को मान जाता है
कहीं ज़ाहिर ये तेरी चाह न कीमरते मरते भी हम ने आह न की
जब कि ईधर तिरी निगाह पड़ीमेरे ही दिल पे मेरी आह पड़ी
आश्ना जो मज़ा का होता हैअपने हक़ में वो काँटे बोता है
मैं तुझे वाह क्या तमाशा हैज़ेहन में आश्ना तराशा है
बे-कसी में असर यगाना हैदिल भी उस का नहीं बेगाना है
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