आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "second"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "second"
ग़ज़ल
ऐ दोस्त जुदाई में तेरी कुछ ऐसे भी लम्हे आते हैं
सेजों पे भी तड़पा करता हूँ काँटों पे भी राहत होती है
सबा अफ़ग़ानी
ग़ज़ल
झूटे सिक्कों में भी उठा देते हैं ये अक्सर सच्चा माल
शक्लें देख के सौदे करना काम है इन बंजारों का
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
शमीम करहानी
ग़ज़ल
फिर ये सोचों में हैं मायूसी की लहरें कैसी
फिर ये हर दिल में उदासी का गुज़र कैसा है