आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "shaadi-e-vasl"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "shaadi-e-vasl"
ग़ज़ल
ग़म-ए-फ़ुर्क़त ही में मरना हो तो दुश्वार नहीं
शादी-ए-वस्ल भी आशिक़ को सज़ा-वार नहीं
अल्ताफ़ हुसैन हाली
ग़ज़ल
लुत्फ़ आए जो शब-ए-वस्ल मोअज़्ज़िन सो जाए
क्यूँकि वो गोश-बर-आवाज़ नज़र आते हैं
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
पूछा ख़िताब यार से किस तरह कीजिए शाम-ए-वस्ल
चुपके से अंदलीब ने फूल से कुछ कहा कि यूँ
एस ए मेहदी
ग़ज़ल
सदा सुनते ही गोया मुर्दनी सी छा गई मुझ पर
ये शोर-ए-सूर था या वस्ल का इंकार था क्या था
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
हज़ार शर्म करो वस्ल में हज़ार लिहाज़
न निभने देगा दिल-ए-ज़ार ओ बे-क़रार लिहाज़
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
है बे-नियाज़-ए-शादी-ओ-ग़म मेरी बे-ख़ुदी
ये वो चमन है जिस में बहार ओ ख़िज़ाँ नहीं
जगदीश सहाय सक्सेना
ग़ज़ल
न जाने सीना-ए-एहसास पर ये हात है किस का
तबीअत बे-नियाज़-ए-शादी-ओ-ग़म होती जाती है
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
मज़ाक़-ए-शादी-ओ-ग़म ता-कुजा ऐ ख़ाक के पुतले
जो इन दोनों से बाला-तर हों ऐसी भी कोई शय ला
शफ़ीक़ जौनपुरी
ग़ज़ल
यास-ओ-उमीद-ओ-शादी-ओ-ग़म ने धूम उठाई सीने में
ख़ूब मुझे है आज धमा-धम मार-कुटाई सीने में