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ग़ज़ल
अपने अपने दिल के अंदर सिमटे हुए हैं हम दोनों
गुम-सुम गुम-सुम मैं भी बहुत हूँ खोया खोया तू भी है
फ़राग़ रोहवी
ग़ज़ल
उस के हाथ में ग़ुब्बारे थे फिर भी बच्चा गुम-सुम था
वो ग़ुब्बारे बेच रहा हो ऐसा भी हो सकता है
सय्यद सरोश आसिफ़
ग़ज़ल
उर्फ़ी आफ़ाक़ी
ग़ज़ल
यहाँ गुम-सुम से लोगों पर कभी पलकें नहीं उट्ठीं
इशारा करने वालों को इशारा होने लगता है