आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "super"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "super"
ग़ज़ल
सर-ए-कारज़ार खड़े हो 'शौक़' तो यूँ ही सीना सुपर रहो
कि वो लोग कौन से बच गए जिन्हें एहतियात अदू से थी
रज़ी अख़्तर शौक़
ग़ज़ल
तुम्हारा ग़म न हो तो ज़िंदगी अच्छी नहीं लगती
ख़मोशी से बहे जो वो नदी अच्छी नहीं लगती
पंकज सुबीर
ग़ज़ल
मैं आँधियों में हाथ भी पकड़ूँ तिरा तो क्या
इक शाख़-ए-बे-सिपर हूँ हवाओं की जंग में
मुसव्विर सब्ज़वारी
ग़ज़ल
ख़ुद जिस के सामने सिपर-अंदाख़्ता है हुस्न
ऐसी भी इक निगाह किए जा रहा हूँ मैं