आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "taabish-e-gesuu-e-khamdaar"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "taabish-e-gesuu-e-khamdaar"
ग़ज़ल
क्यूँ असीर-ए-गेसू-ए-ख़म-दार-ए-क़ातिल हो गया
हाए क्या बैठे-बिठाए तुझ को ऐ दिल हो गया
अबुल कलाम आज़ाद
ग़ज़ल
असीर-ए-हल्क़ा-ए-गेसू-ए-ख़ूबाँ हो नहीं सकता
वो दिल तू जिस को तस्कीं दे परेशाँ हो नहीं सकता
तिलोकचंद महरूम
ग़ज़ल
किस को ख़याल-ए-गेसू-ओ-ज़ुल्फ़-ए-दोता नहीं
दुनिया में कौन है जो असीर-ए-बला नहीं
फ़ज़ल हुसैन साबिर
ग़ज़ल
आराइश-ए-गेसू-ए-सुख़न करते रहेंगे
बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तर ख़िदमत-ए-फ़न करते रहेंगे
लुत्फुल्लाह खां नज़्मी
ग़ज़ल
ना ज़िक्र-ए-गेसू-ए-पेचाँ ना ज़ुल्फ़ बरहम है
हमारे ग़म का फ़साना भी कितना मुबहम है