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ग़ज़ल
कुछ भी हासिल नहीं यक-तरफ़ा मोहब्बत का जनाब
उन की जानिब से भी हाँ हो तो ग़ज़ल होती है
नाज़ ख़यालवी
ग़ज़ल
तरफ़ा-ए-सोहबत है कि सुनता नहीं तू एक मिरी
वास्ते तेरे सुना मैं ने सुना क्या क्या कुछ
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
किसी की बात सुनना भी ज़रूरी है तफ़ावुत में
कि यक-तरफ़ा कोई भी फ़ैसला अच्छा नहीं होता
लतीफ़ साहिल
ग़ज़ल
किताबों में पढ़े जब एक-तरफ़ा प्यार के क़िस्से
ख़ुद अपना दिल तमन्नाओं का मक़्तल कर दिया मैं ने
अनुभव गुप्ता
ग़ज़ल
अपनी ही लाश पे हैं अश्क बहाए हुए लोग
हम हैं यक-तरफ़ा मोहब्बत के सताए हुए लोग